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खादी
एवं ग्रामीण उद्योग योजनाएं ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
खादी भारत के स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के दौरान औपनिवेशिक ब्रिटिश राज के
विरुद्ध एक अवधारणा के रूप में विकसित हुई। स्वदेशी का अभिप्राय इस
अवधारणा से है, 20 वीं सदी की शुरुआत में स्वतंत्रता संग्राम के लोकप्रिय
नारे और ठोस कार्यकाल में, भारतीय क्षमता का एक दृढ़-वचन मानचेस्टर एवं
लंकाशायर से फेबरिक कपडे़ आयात करने के बजाय अपने स्वयं के कपड़े निर्माण
करना था, जिसने औद्योगिक क्रांति के बाद भारत में ब्रिटिश दबाब के खिलाफ
शुरू से ही प्रोत्साहन प्रदान किया। स्वाभाविक रूप से, आजादी से पहले के
दौर में यह योजना गैर सरकारी संगठनों के द्वारा कार्यान्वित थी।
 स्वतंत्रता के पश्चात—
यद्यपि
अवधारणा का कारण और अधिक अस्तित्व में नहीं था, सरकार को अपेक्षित सहायता
संगठन के साथ ग्रामीण दस्तकारों को पनपने में मदद करने के क्रम में सहायता
प्रदान करने के लिए जरूरत महसूस हुई। 1957 में एक सांविधिक निकाय खादी ग्रामीण उद्योग आयोग,
योजना बनाने, कार्यक्रम और खादी ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा के उद्देश्य के
साथ स्थापित किया गया था। राज्य स्तर पर, एक राज्य खादी एवं ग्रामीण
उद्योग बोर्ड रखने का निर्णय लिया गया था। देश में सभी राज्य खादी एवं
ग्रामीण उद्योग बोर्ड, अपने राज्यों में अपने मानदंडों के अनुसार योजनाओं
को लागू करने एवं दिशा निर्देश के लिए और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान
में रखने के लिए, के.वी.आई.सी. के द्वारा वित्त पोषण हैं।
यहाँ ग्राम उद्योगों की 100 से अधिक श्रेणियाँ हैं,
जिसमें खनिज आधारित, वन आधारित, कृषि आधारित और खाद्य उद्योग शामिल हैं।
यह उद्योग या तो सीधे के.वी.आई.सी. के द्वारा 4777 पंजीकृत संस्थाओं के
माध्यम से या 30100 औद्योगिक सहकारी समितियों के द्वारा 30 राज्य खादी
बोर्ड के माध्यम से स्थापित किये गये हैं। के.वी.आई. क्षेत्र के
उत्पाद का विपणन 15431 बिक्री दुकानों के माध्यम से किया जाता है इससे एक
बड़ी संख्या में लोगों को लाभ होता है, जिसमें से लगभग 32% अनुसूचित जाति/
अनुसूचित जनजाति वर्ग के हैं तथा 46% महिलाएँ हैं। के.वी.आई.सी. की
वार्षिक रिपोर्ट 2003-2004 के सन्दर्भ में, कुल के.वी.आई. उत्पादन रुपए
9681.77 करोड़ है, बिक्री रुपये 11,575.21 करोड़ हुई और 71.19 लाख
व्यक्तियों को रोजगार मिला।
कुल रोजगार में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं की भागीदारी
क्रमश: 26%, 8% और 41% है। इस देश में, यहाँ 30 राज्य यू.टी./ के.वी.आई.
बोर्ड, 5999 पंजीकृत संस्थाऐं और 30138 सहकारी समितियाँ हैं, जिनके माध्यम
से के.वी.आई. गतिविधियाँ कार्यान्वित की जा रही हैं। इस क्षेत्र के
अंतर्गत, विपणन उद्देश्यों के लिए 15431 बिक्री आउटलेट्स हैं, जहां केवल
के.वी.आई. उत्पादों को बेचा जा सकता है।
दिल्ली खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्ड — राष्ट्रीय
राजधानी क्षेत्र दिल्ली में दिल्ली खादी तथा ग्रामीण उद्योग बोर्ड जिनकी
स्थापना 1.5.83 पर हुई थी, के द्वारा के.वी.आई. योजना का कार्यान्वयन किया
जा चुका है। समय-समय पर बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है,। अन्तिम वार श्री
मुकेश शर्मा, विधायक, के द्वारा अध्यक्ष के रूप में 08.01.2002 पर किया
गया था। बोर्ड समय-समय पर के.वी.आई.सी., भारत सरकार तथा राष्ट्रीय राजधानी
क्षेत्र दिल्ली सरकार के द्वारा आरम्भ हुई विकास योजनाओं के लिए एक
कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में काम कर रहा है एवं विभिन्न प्रकार की
सेवाओं की पेशकश करता है:-
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