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Greetings From Director General (Prison)
दिल्ली कारागार बन्दियों को सुधारने, उनके पुनरुत्थान और उन्हे पुन: समाज में स्थापित करने के लिये सदैव प्रयासरत है।कारागार प्रशासन के सामने सबसे बडी चुनौती बन्दियों के द्वारा बिताये जा रहे समय को एक अर्थपूर्ण दिशा देना है, ताकि बिताया गया समय उद्देश्यपूर्ण साबित हो सके।

इस दिशा में सर्वप्रथम बन्दियों को कुशल और पारदर्शी प्रशासन प्रदान करके,उनकी वेदना को कम करने का प्रयास किया जाता है। बंदियों को अपना समय उद्देश्यपूर्ण तरीके से व्यतीत करने का अवसर प्रदान किया जाता है,ताकि वह अपनी रचनात्मक क्षमता को नये-नये हुनर सीखकर,शिक्षण जारी रखकर एवंअपने आंतरिक संघर्ष को शांत करके बढावा दे सकें।यह हमारा सतत प्रयास है कि प्रत्येक बंदी की गरिमा व सम्मान को बनाये रखा जा सके।

आज दिल्ली कारागार को बंदियों के मानवाधिकार के रक्षक के अग्रदूत के रुप में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा जाना जाता है।

दिल्ली कारागार को सुधारात्मक गतिविधियों में नवीनता को अपनाने के लिये जाना जाता है। सेमी-ओपन कारागार एक ऐसा ही प्रयास है, जिसके तहत सिद्धदोष बंदी जिनका आचरण बहुत अच्छा है, ऐसे परिवेश में रखे जाते हैं जहाँ वह सहज रुप से समाज के साथ पुन: जुड सकें तथा पुनर्वास के लिये बेहतर प्रयास कर सके। योग, चिन्तन करना तथा आध्यात्मिक गतिविधियाँ सुधार तथा पुनर्वास नीति के मुख्य अंग है जिससे बंदियों के जीवन में एक बेहतरीन सकारात्मक बदलाव आता है। आध्यात्मिक कार्यक्रम में अब तक हजारों बंदियों ने भाग लेकर अपने जीवन को एक सकारात्मक दिशा प्रदान की है।

दिल्ली कारागारके द्वारान. ०६में एक शिशु गृह है, जिसमें ०६ वर्ष तक के बच्चो को रखा जाता है, बाद में गैर सरकारी संस्थानों (N.G.O.) की मदद से उनकी शिक्षा का कार्यक्रम जारी रखा जाता है। बंदियों को अधिक से अधिक समय रचनात्मक गतिविधियों में व्यतीत करने के लिये विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में, जिसमें टी.जे. एफ.एम. (TJ FM) रेडियो भी शामिल है,में भाग लेने के लियेप्रेरित किया जाता है। बंदियों को कविता पाठ, निबंध प्रतियोगिता, पत्रकारिता, चित्रकला इत्यादि में भाग लेने के लिये प्रेरित किया जाता है। इसके अतिरिक्त उन्हे अपने अपने कारागार के समाचार पत्र को तैयार करने के लिये भी प्रेरित किया जाता है।

राष्ट्रीय जूट बोर्ड की सहायता से कलात्मक जूट के थैलों का निर्माण किया जाता है। जूट के जेवर व आभूषण बनाने के प्रशिक्षणकार्यक्रम को भी प्रारंभ किया गया है। पहली बार मोटर कार उद्योग के साथ मिलकर(Wire Harness) प्रशिक्षणकार्यक्रम को प्रारंभ किया गया है।बेकरी, काष्ठकारी, सरसों के तेल को निकालना तथा बुनाई से संबंधित परियोजनाओं के द्वारा बंदियों को नये नये हुनर सिखाकर, रोजगार के अवसर प्रदान करती है ताकि कारागार से छूटने के बाद अपना जीवन यापन उचित रुप से कर सकें। इसी के साथ साथ बंदी कारावास के दौरान भी विभिन्न प्रकार के कार्यों में अपने आपको व्यस्त रखकर अपने जीवन यापन हेतु जीविका उपार्जन करते हैं। यह सब कार्यक्रम हमें बन्दियो केसुधार, पुनर्वास एवं एकीकरण के उद्देश्य को प्राप्त करने में सहायता करते हैं।इन उद्देश्यो की प्राप्ति के लिये बहुत सी संस्थायें आगे बढकर सक्रिय योगदान दे रहीं हैं ताकि बंदियों के भविष्य को एक सही रूपरेखा दी जा सके जिससे वह समाज में वापस जाकर अपने जीवन को उचित ढंग से व्यतीत कर सके।

We welcome you to our website.

Delhi Prisons strive to reform, reintegrate and rehabilitate the prisoners in the society.The challenge before any Jail Administration is to make the imprisonment purposeful in every way for those who have to undergo the same.We begin, by attempting to minimize the suffering of a person who has been imprisoned by providing an efficient and transparent administration.We provide them the opportunity to use their time purposefully and constructively by learning new skills, pursuing education and resolving their inner conflicts. It has been our endeavour to treat every prisoner in Delhi Prisons with dignity and respect.


Today, Delhi Prisons are perceived as harbinger of human rights of prisoners and are being considered as role model by the National and International Prison Community.

Delhi Prisons are known for innovations in correctional activities. Open/Semi-open Prison is one such effort wherein convicted prisoners having good conduct may undergo their sentence in a relaxed environment to enable rehabilitation and reintegration into the society. Yoga, meditation and spiritual activities constitute an important component of reformation and rehabilitation policy of Delhi Prisons which bring qualitative change in the life of prisoners. Thousands of prisoners have participated in the spiritual programmes conducted by the Prison administration and a marked change has been observed in their behaviour.

There is a creche in the Prisons to take care of children till the age of six years. Later their schooling is undertaken with the help of NGOs. A number of activities are undertaken for the entertainment of inmates including TJ's FM Radio's have been launched in the jails to engage the prison inmates in creative activities and in learning vocational skills. The Prison inmates are encouraged to participate in creative literary activities like poetry and essay writing, journalism, painting etc. and they themselves edit the monthly newsletter of their jails.

Jute designer bags are being manufactured by the inmates in collaboration with National Jute Board. Jute jewellery and ornament training programmes have also been started. For the first time, a collaboration with the Automobile sector has been launched for training inmates in Write Harness Training Programme.

The projects relating to bakery, carpentry, mustard oil extraction, weaving etc. have helped inculcate skills which will open up employment opportunities for inmates on their release. At the same time, they earn for the work they do during their incarceration period and their mind is purposefully occupied. This helps to fulfill our mission to reform, rehabilitate and reintegrate the inmates.

A number of organizations have come forth to play an active role in shaping designate of the inmates inside Prison and in their lives once their term is over and they go back to society.

Sincerely
Director General (Prisons)
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This website is updated on 27-Sep-2010.